'कानून का राज' या 'व्यवस्था का मजाक'? अब जनता के सब्र का इम्तिहान न लो!
"सुनो सरकार! कुंभकर्णी नींद से जागो। यह जो लोकतंत्र की दुहाई देकर तुम अपनी कुर्सी बचा रहे हो, यह धीमे जहर की तरह देश को खत्म कर रहा है। बालासाहेब ठाकरे की आत्मा आज भी इस माटी पर मंडरा रही है, और वह देख रही है कि कैसे कानून के नाम पर आम आदमी के साथ अन्याय हो रहा है। मैं तेनसिंह चंद्रवंशी, सनातन धर्म जागृति विकास परिषद का पूर्व जिला पदाधिकारी के तौर पर, आज इस मंच से दो टूक बात कर रहा हूँ। अब बहुत हो गया। अन्याय के खिलाफ आवाज उठाना मेरा धर्म है, और संविधान की रक्षा करना मेरी कानूनी जिम्मेदारी भी है।"
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जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो न्याय की भीख किससे माँगें?
"हम अक्सर सुनते हैं कि 'कानून अंधा होता है', लेकिन आज ऐसा लगता है कि कानून को लकवा मार गया है। एक आम नागरिक, एक गरीब, एक असहाय जब थाने की दहलीज पर खड़ा होता है, तो उसे न्याय नहीं, अपनी बेबसी की गंध आती है। जो लोग खाकी वर्दी पहनकर संविधान की रक्षा की शपथ लेते हैं, वही आज भ्रष्टाचार और सत्ता की दलाली में लिप्त हैं। ' सनातन धर्म जागृति विकास परिषद ' ने हमेशा से इन मुद्दों को उजागर किया है। क्या यही रामराज्य है? क्या इसी के लिए हमारे पूर्वजों ने अपना खून बहाया था? याद रखो, जब कानून का डर खत्म हो जाता है, तो फिर जनता का आक्रोश फूटता है, और उस आक्रोश को संभालना किसी के बस में नहीं होता।"
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भूल गए हैं कुर्सी का नशा, कि जनता जनार्दन होती है!
"कुर्सी पर बैठे लोगों को यह भ्रम हो गया है कि वे इस देश के मालिक हैं। अरे, वे तो सिर्फ सेवक हैं। जनता ने उन्हें सेवा करने का मौका दिया है, न कि देश को लूटने का। मैं, तेनसिंह चंद्रवंशी, आज इस ब्लॉग के माध्यम से उन्हें यह याद दिलाना चाहता हूँ। यदि सिस्टम नहीं सुधरा, यदि ' सनातन धर्म जागृति विकास परिषद ' के कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों को प्रताड़ित करना बंद नहीं किया गया, तो फिर सड़कों पर संग्राम होगा।
हम कानूनी रास्ते से लड़ते हैं, लेकिन जब कानून ही कमजोर पड़ जाए, तो फिर सीना तानकर खड़ा होना पड़ता है। यह भगवा और यह संगठन, अन्याय के खिलाफ ढाल बनकर खड़ा रहेगा। अब बहुत हो गया, हम इन मुद्दों पर चुप नहीं बैठेंगे:
'सिस्टम' की मिलीभगत: क्या यह सच नहीं है कि पीपली जैसे मामलों में प्रशासन ने अपराधियों पर कार्रवाई के बजाय शिकायतकर्ताओं को ही डराया-धमकाया?
सत्ता का नशा: जब हमारे संगठन ने [संभावित घटना का स्थान] में [समस्या] के खिलाफ आवाज उठाई, तब पुलिस प्रशासन ने कानून का पालन करने के बजाय सत्ता के इशारे पर काम किया।
चुप्पी तोड़ो: NEET जैसे पेपर लीक मामलों में, जहाँ NTA की नाक के नीचे भ्रष्टाचार हुआ, सरकार दोषियों को बचाने के लिए मौन धारण किए बैठी है। अब यह चुप्पी देशद्रोह जैसी मानी जाएगी!
जनता का सब्र: 'कानून का राज' का मतलब सिर्फ आम आदमी को प्रताड़ित करना नहीं होता। जब व्यवस्था खुद मजाक बन जाए, तो जनता के पास सड़कों पर उतरकर न्याय मांगने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।"
अन्त मे यही कहना चाहूगा की -----
"वक्त आ गया है कि सोई हुई चेतना को जगाया जाए। डर को छोड़ो, और अन्याय के खिलाफ खड़े हो जाओ। हम न किसी से डरते हैं, न किसी को डराते हैं, बस अपने देश और न्याय के साथ खड़े हैं।
