मदन राठौड़ के बयान पर भड़का युवा आक्रोश: जंतर-मंतर के संघर्ष को 'भाड़े का टट्टू' कहना अहंकार की पराकाष्ठा
परिचय: युवाओं के अपमान पर उठे सवाल
देश के प्रधानमंत्री एक तरफ यह दावा करते हैं कि युवाओं का हित उनकी सर्वोच्च प्राथमिकता है, वहीं दूसरी तरफ सत्ता में बैठे जिम्मेदार नेता जंतर-मंतर पर अपने हक और रोजगार के लिए शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे युवाओं को अपमानित करने से बाज नहीं आ रहे हैं. राजस्थान भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद मदन राठौड़ द्वारा आंदोलनरत युवाओं को "भाड़े का टट्टू" और "पत्थरबाज" कहना न केवल शर्मनाक है, बल्कि देश के करोड़ों बेरोजगार युवाओं के स्वाभिमान पर सीधा हमला है.
जंतर-मंतर का युवा कोई गुलाम नहीं है
दिल्ली के जंतर-मंतर पर बैठा देश का युवा कोई किसी का किराए का नौकर नहीं है जो सत्ता के इशारे पर नाचेगा. वे अपने रोजगार और अपने भविष्य की भीख नहीं मांग रहे, बल्कि संविधान द्वारा प्रदत्त अपना संवैधानिक अधिकार मांग रहे हैं. जब देश का सर्वोच्च नेतृत्व युवाओं को प्राथमिकता देने की बात करता है, ऐसे में एक प्रदेश अध्यक्ष की ऐसी अमर्यादित भाषा उनकी दोहरी सोच को बेनकाब करती है.
कुर्सी और पद हमेशा के लिए नहीं होते
राजनीति में घमंड और अहंकार कभी टिक नहीं सका है। आज जो नेता कुर्सी के नशे में चूर होकर युवाओं की आवाज को कुचलने का प्रयास कर रहे हैं, उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि जनता और युवाओं का आक्रोश एक दिन बड़ा भूचाल बनकर सामने आता है। यदि युवाओं का श्राप लग गया, तो राजनीति की जमीन खिसकते देर नहीं लगेगी.
हमारी दो-टूक मांग: सार्वजनिक रूप से मांगनी होगी माफी
लोकतंत्र में जनता और युवाओं की आवाज को दबाया नहीं जा सकता. हमारी स्पष्ट और दो-टूक मांग है कि मदन राठौड़ जी अपने इस अपमानजनक और अमर्यादित बयान के लिए देश के युवाओं से तत्काल सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। यदि समय रहते अहंकार नहीं छोड़ा गया, तो देश का युवा लोकतांत्रिक तरीके से ऐसा सबक सिखाएगा कि जवाब देते नहीं बनेगा।