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वोट चार, उम्मीदवार सौ पार! पूर्व जिला पदाधिकारी एवं युवा संघ परिषद के अध्यक्ष तेनसिंह चंद्रवंशी का चुनावी दलालों पर सीधा वार!

Tensingh chandravanshi 0

गांव में वोट हैं चार और सरपंच उम्मीदवार सौ पार! सुनो नया-नया शौक पालने वालों, राजनीति और समाज सेवा तुम जैसों के बस की बात नहीं!

जय हिंद! जय भारत! मेरे क्षेत्र के तमाम स्वाभिमानी बुजुर्गों, माताओं-बहनों और मेरे बब्बर शेर युवा साथियों को तेनसिंह चंद्रवंशी का सीधा ललकार भरा प्रणाम!

आज जो बातें मैं लिखने जा रहा हूँ, हो सकता है कि कई लोगों की छाती पर सांप लोटने लगे। कई मौसमी नेताओं के पेट में मरोड़ उठने लगेगी। लेकिन सुन लो—मैं तेनसिंह चंद्रवंशी हूँ! सच बोलने से न कल डरा था, न आज डरता हूँ। जिसको बुरा लगता है, खुशी-खुशी लगे, मुझे किसी की चापलूसी करने की आदत नहीं है!

अरे, ये आजकल हमारे गांव-देहात में कौन सा घटिया नाटक शुरू हो गया है? ज़रा आंखें खोलकर देखो! गांव में वोट गिनो तो कुल जमा चार बचे हैं, लेकिन सरपंच पद के दावेदार देखो तो 'सौ पार' जा रहे हैं! गली-गली, नुक्कड़-नुक्कड़ पर नए-नए टपोरी चेहरे बैनर-पोस्टर टांगकर घूम रहे हैं। खुद को बड़ा तोप समझ रहे हैं। अरे भाई, ये कौन सी नई बगावत है? जो कल तक अपने घर का खर्च ढंग से नहीं चला सकते थे, वो आज पूरे गांव का मुखिया बनने का ख्वाब देख रहे हैं! 

 हालांकि मेरे पास टाइम नहीं रहता है वीडियो बनाने का लेकिन फिर भी मैंने कोशिश की है ✌

"मैं पूर्व जिला पदाधिकारी के रूप में अपना पूरा कार्यकाल शान से पूरा करके निकला हूँ और आज 'युवा संघ परिषद' के संस्थापक एवं अध्यक्ष के रूप में सीना तानकर खड़ा हूँ! मेरी समाज सेवा किसी चुनाव की मोहताज नहीं है। लेकिन इन चार वोट वाले सौ-सौ दावेदारों को देखकर हंसी भी आती है और इनके नंगेपन पर तरस भी आता है!"

1. बरसाती मेंढकों की तरह गटर से बाहर निकले नए-नए उम्मीदवार!

जैसे पहली बारिश होते ही नाले और गटर से मेंढक बाहर निकलकर टर्राने लगते हैं, ठीक वैसे ही पंचायत चुनाव का ऐलान होते ही उम्मीदवारों की बाढ़ आ गई है। कल तक जिन्हें गांव की सड़कों की धूल का पता नहीं था, जिन्हें यह नहीं मालूम कि गांव के गरीब, मजदूर और किसान रात को भूखे सोते हैं या पेट भरकर, वो आज दो कड़क नए सफेद कुर्ते-पायजामे सिलवाकर हाथ जोड़कर सड़कों पर बेशरमों की तरह टहल रहे हैं।

अरे ओ चुनावी नेताओं! राजनीति और समाज सेवा कोई फैशन शो नहीं है, ना ही यह कोई रात का शौक है जो सुबह उठकर पूरा कर लिया जाए। अगर राजनीति में उतरना है तो सीने में फौलाद का जिगर चाहिए, जनता के हक के लिए अफसरों से टकराने की औकात चाहिए!

मैं इन नए उबलते हुए छछूंदरों से सीधे-सीधे एक कड़वा सवाल पूछता हूँ—**"जब गांव पर कोई बड़ी मुसीबत आई थी, जब गांव का गरीब राशन, पानी और इलाज के लिए तड़प रहा था, तब तुम किस बिल में दुबककर बैठे थे?"** उस वक्त तुम्हारा कोई अतापता नहीं था, और आज सरपंच बनने की होड़ में छाती फुलाए घूम रहे हो?

2. सरपंच की कुर्सी कोई मुफ्त की रेवड़ी या ऐश-आराम की गद्दी नहीं है!

इन नौसिखियों के दिमाग में यह गलतफहमी बैठ गई है कि एक बार सरपंच बन गए, तो सरकारी पैसा हजम करेंगे, गाड़ी में घूमेंगे और गांव पर हुकुम चलाएंगे। अरे बेवकूफों! सरपंच की कुर्सी कोई ऐश-आराम की गद्दी नहीं है, यह पूरे गांव के स्वाभिमान, मर्यादा और विकास का कांटों भरा ताज है!

इन चुनाव बाज दलालों को मेरी सीधी चेतावनी है:

  • चाय के अड्डों पर बड़ी-बड़ी हांकने वालों: ज़बान चलाना बहुत आसान है, धरातल पर उतरकर पसीना बहाने में नानी याद आ जाती है!
  • शराब और पैसों के दम पर कूदने वालों: याद रखो, तुम अपनी हवस के लिए पैसे पानी की तरह बहा सकते हो, लेकिन मेरे गांव की जनता के स्वाभिमान को कभी खरीद नहीं सकते!
  • दिखावटी समाजसेवियों: चुनाव खत्म होते ही तुम्हारा यह जनसेवा का ढोंग भाप बनकर उड़ जाएगा और तुम फिर से अपने-अपने बिलों में घुस जाओगे।

3. 'युवा संघ परिषद' बनाएगी इन झूठे नेताओं का हिसाब!

मैंने अपना राष्ट्रीय संगठन सनातन धर्म जागृति विकास परिषद का पूर्व जिला पदाधिकारी का कार्यकाल पूरी ईमानदारी और धमक के साथ निभाया है। और आज **'युवा संघ परिषद' के संस्थापक एवं अध्यक्ष** के रूप में मैं अपने क्षेत्र के एक-एक युवा को यह विश्वास दिलाता हूँ कि गांव की राजनीति को जो गंदा कर रहे हैं, उनका हिसाब हम करेंगे।

युवा संघ परिषद का एक-एक कार्यकर्ता बब्बर शेर है। हम गांव में भाई से भाई को लड़ाने वाली इस नीच राजनीति को उखाड़ फेंकेंगे। हमारा मकसद किसी चुनाव की मलाई खाना नहीं, बल्कि युवाओं के अधिकार, शिक्षा, रोजगार और गांव के सच्चे विकास के लिए किसी से भी भिड़ जाना है। तेनसिंह चंद्रवंशी न कभी झुका है, न कभी झुकेगा!


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4. ऐ गांव वालों! अब जाग जाओ और इन बहरुपियों को जूते की नोक पर रखो!

मेरे स्वाभिमानी भाइयों, माताओं, बहनों और बुजुर्गों! अब समय आ गया है इन ढोंगियों का नकाब उतारने का। यह जो 'सौ पार' उम्मीदवार गांव में हाथ जोड़कर गिड़गिड़ा रहे हैं, यह चुनाव बीतते ही आपको पहचानने से भी इंकार कर देंगे। इनके झूठे वादों, शराब की बोतलों और चंद पैसों के लालच में अपने गांव का सौदा मत होने देना!

अपना वोट उसे दो जो आपके सुख-दुख में आधी रात को भी नंगे पैर खड़ा रहे! जो किसी अफसर या बड़े नेता के सामने आपकी हक की बात छाती ठोककर कह सके! ये मौसमी मेंढक तो चुनाव के बाद रफूचक्कर हो जाएंगे, लेकिन आपका तेनसिंह चंद्रवंशी हर लड़ाई में आपके आगे ढाल बनकर खड़ा रहेगा!


बुलंद आवाज़ में कहो—गांव हमारा है, फैसला हमारा होगा!

— तेनसिंह चंद्रवंशी
संस्थापक एवं अध्यक्ष: युवा संघ परिषद
( पूर्व जिला पदाधिकारी (सनातन सेना संगठन)

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